नमस्कार दोस्तों
पायस एस्ट्रो में आपका स्वागत है। इस वीडियो में हम महीनावार, लक्षणों के आधार पर 2026 में ग्रहों के कारण, आम आदमी के जीवन में आने वाली परेशानियों और उनके उपायों पर चर्चा करेंगे।
१. शीतकाल का चरम (जनवरी – फरवरी)
ऋतु: शिशिर (Shishir) | मुख्य ग्रह: शनि (मीन में)
शारीरिक बदलाव: कफ शरीर में जमा होने लगता है। कड़ाके की ठंड के कारण पाचन शक्ति (जठराग्नि) बहुत तेज होती है। शरीर भारी और गर्म भोजन की मांग करता है। त्वचा अत्यधिक रूखी हो जाती है। शनि के मीन (जल तत्व) में होने के कारण पैरों में सूजन, जोड़ों में जकड़न और सुस्ती महसूस हो सकती है।
मानसिक व स्वभाव: लोग अंतर्मुखी (Introvert) और सुस्त महसूस करते हैं। काम में आलस्य और ‘सेरोटोनिन’ की कमी से उदासी हो सकती है। अकेलापन महसूस होना या पुरानी बातों का याद आना “आध्यात्मिक वैराग्य” पैदा करता है।
व्यवहार: लोग काम में “परफेक्शन” ढूंढेंगे लेकिन शरीर साथ नहीं देगा। अनुशासित दिनचर्या ही सफलता की कुंजी होगी।
उपचार: तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें (यह शनि और वात दोनों को शांत करता है)। अदरक, काली मिर्च और तुलसी का काढ़ा पिएं। गुनगुना पानी ही पिएं।
ज्योतिषीय उपचार: शनिवार को पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
मंत्र: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें। जरूरतमंदों को काले कंबल या जूते दान करें।
2. नव-स्फूर्ति और वसंत (मार्च – अप्रैल)
ऋतु: वसंत (Vasant) | मुख्य ग्रह: सूर्य (मेष में उच्च का) दोष: कफ प्रकोप (पिघलना)
शारीरिक बदलाव: जमा हुआ कफ पिघलने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी और एलर्जी बढ़ती है। लेकिन सूर्य के मेष राशि में जाने से शरीर में नई ऊर्जा और स्फूर्ति का संचार होता है। आँखों में तेजी और चेहरे पर तेज बढ़ता है।
मानसिक व स्वभाव: यह समय अत्यधिक उत्साह और साहस का है। लोग नए रिस्क लेने के लिए तैयार रहते हैं। पुराने अवसाद से बाहर निकलकर लोग भविष्य के प्रति आशावादी (Optimistic) हो जाते हैं।
व्यवहार: सामाजिक सक्रियता बढ़ेगी। नए बिजनेस आइडियाज पर काम शुरू होगा। लोग अपनी बात को मजबूती से रखना पसंद करेंगे।
उपचार: * वमन/हल्का आहार: शहद का सेवन करें। पुराने जौ और मूंग की दाल खाएं। भारी और मीठे भोजन से बचें। सुबह नीम की कोमल पत्तियों का सेवन रक्त शुद्धिकरण के लिए करें।
ज्योतिषीय उपचार: * तांबे के लोटे से सूर्य को जल (अर्घ्य) दें।
मंत्र: “आदित्य हृदय स्तोत्र” का पाठ करें। पिता का सम्मान करें और गुड़ का दान करें।
३. ग्रीष्म का ताप (मई – जून)
ऋतु: ग्रीष्म (Grishma) | मुख्य ग्रह: मंगल और बुध का प्रभाव दोष: पित्त संचय
शारीरिक बदलाव: शरीर में ‘पित्त’ और गर्मी बढ़ने लगती है। पसीने के कारण डिहाइड्रेशन और कमजोरी महसूस होती है। पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है। मंगल के प्रभाव से शरीर में पित्त जनित विकार (जैसे एसिडिटी या जलन) बढ़ सकते हैं।
मानसिक व स्वभाव: अत्यधिक गर्मी और मंगल के प्रभाव से स्वभाव में चिड़चिड़ापन और आक्रामकता (Aggression) बढ़ती है। लोग जल्दी धैर्य खो देते हैं और छोटी बातों पर बहस की स्थिति बन सकती है।
व्यवहार: लोग शॉर्टकट ढूंढने की कोशिश करेंगे। थकान के कारण कार्यक्षमता (Productivity) घट सकती है। ठंडे और शांत माहौल की तलाश बढ़ेगी।
उपचार: * शीतलता: चंदन का लेप लगाएं। नारियल पानी, सत्तू और बेल का शरबत पिएं। दिन में कम सोएं और ठंडी जगहों पर रहें।
ज्योतिषीय उपचार: * मंगल की उग्रता कम करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें।
गाय को हरा चारा खिलाएं (बुध की शांति के लिए)। ठंडे जल का दान (पियाऊ लगवाना) अत्यंत शुभ है।
४. वर्षा और सौभाग्य (जुलाई – अगस्त)
ऋतु: वर्षा (Varsha) | मुख्य ग्रह: बृहस्पति (गुरु) कर्क में उच्च का दोष: वात प्रकोप
शारीरिक बदलाव: ‘वात’ दोष का प्रकोप बढ़ता है, जिससे जोड़ों का दर्द और पेट की गड़बड़ी हो सकती है। हालांकि, गुरु का कर्क (उच्च) में होना शरीर में हीलिंग (Healing) की प्रक्रिया शुरू करता है। वजन बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जा सकती है।
मानसिक व स्वभाव: यह करुणा, प्रेम और शांति का समय है। लोग भावनात्मक रूप से अधिक जुड़ाव महसूस करेंगे। गुरु के प्रभाव से मन में धर्म और ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी।
व्यवहार: लोग दूसरों की मदद (Helping nature) करेंगे। परिवार के साथ समय बिताना प्राथमिकता होगी। निवेश और दान-पुण्य की ओर झुकाव बढ़ेगा।
आयुर्वेदिक उपचार: * दीपन-पाचन: भोजन में सोंठ और हींग का प्रयोग करें। उबला हुआ पानी पिएं। कच्ची सब्जियां खाने से बचें। तेल से बने हल्के गर्म भोजन का सेवन करें।
ज्योतिषीय उपचार: गुरु की मजबूती के लिए माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
बृहस्पतिवार को चने की दाल या पीली मिठाइयों का दान करें। “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें।
५. शरद की स्पष्टता (सितंबर – अक्टूबर)
ऋतु: शरद (Sharad) | मुख्य ग्रह: केतु और शुक्र का प्रभाव। दोष: पित्त प्रकोप
शारीरिक बदलाव: मानसून के बाद की धूप ‘पित्त’ को बढ़ाती है, जिससे त्वचा रोग या इन्फेक्शन हो सकते हैं। लेकिन शुक्र के प्रभाव से शरीर में आकर्षण और सौंदर्य बढ़ता है। पाचन धीरे-धीरे सुधरने लगता है।
मानसिक व स्वभाव: मानसिक स्पष्टता (Clarity) आएगी। त्योहारों की आहट से मन प्रसन्न रहेगा। सौंदर्य और कला के प्रति रुझान बढ़ेगा। केतु के कारण कभी-कभी भ्रम (Confusion) की स्थिति बन सकती है, लेकिन गुरु का प्रभाव उसे संतुलित करेगा।
व्यवहार: खरीदारी, सजावट और सामाजिक उत्सवों में भागीदारी बढ़ेगी। लोग अपने लुक और प्रेजेंटेशन पर अधिक ध्यान देंगे।
आयुर्वेदिक उपचार: * चंद्रिका स्नान: चांदनी रात में टहलें। घी का सेवन करें क्योंकि यह पित्त को शांत करता है। त्रिफला चूर्ण का सेवन रात को गुनगुने पानी के साथ करें।
ज्योतिषीय उपचार: * शुक्र के लिए सफेद वस्त्र पहनें और इत्र (Perfume) का प्रयोग करें।
केतु की शांति के लिए कुत्तों को रोटी खिलाएं और गणेश जी की आराधना करें।
६. हेमंत और पूर्णता (नवंबर – दिसंबर)
ऋतु: हेमंत (Hemant) | मुख्य ग्रह: सूर्य (मूलांक 1) | दोष: दोषों का संतुलन
शारीरिक बदलाव: शरीर की शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) अपने चरम पर होती है। मांसपेशियों में मजबूती आती है। भूख अच्छी लगती है और गहरी नींद आती है। शरीर फिर से ऊर्जा संचय करने की स्थिति में आ जाता है।
मानसिक व स्वभाव: स्वभाव में ठहराव, आत्मविश्वास और नेतृत्व (Leadership) का भाव आएगा। साल के अंत तक लोग खुद को स्थापित और सुरक्षित महसूस करेंगे। “मैं यह कर सकता हूँ” वाली भावना प्रबल होगी।
व्यवहार: लोग अपनी साल भर की उपलब्धियों का विश्लेषण करेंगे। अगले साल की बड़ी प्लानिंग शुरू होगी। रिश्तों में मजबूती आएगी और लोग अधिक जिम्मेदार बनेंगे।
आयुर्वेदिक उपचार: * पुष्टि: च्यवनप्राश, मेवे और मखाने का सेवन करें। दूध के साथ अश्वगंधा लें। कठिन व्यायाम (जिम/योग) करने का यह सबसे सही समय है।
ज्योतिषीय उपचार: * सूर्य की ऊर्जा के लिए सुबह जल्दी उठें (ब्रह्म मुहूर्त)।
लाल रंग के वस्त्र धारण करें। गायत्री मंत्र का जाप आपके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
कुछ गुप्त टिप (Secret Tip):
२०२६ का मूलांक १ है और पूरे साल बृहस्पति (गुरु) का उच्च प्रभाव रहेगा। इसलिए, इस साल जो लोग “ज्ञान” (Knowledge) और “अनुशासन” (Discipline) को अपनाएंगे, उनकी प्रगति कोई नहीं रोक पाएगा।
विशेष उपाय: प्रतिदिन एक तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखें और सुबह उसे पिएं। यह आपके सूर्य (मूलांक १) को पूरे साल बलवान रखेगा।
दान की शक्ति: २०२६ में ‘गुरु’ उच्च का है, इसलिए शिक्षा या भोजन का दान आपके भाग्य को चार गुना बढ़ा देगा।
